Koshish Karne Walon Ki

कोशिश करने वालों की
- सोहन लाल द्विवेदी (Sohan Lal Dwivedi)

Few people think that it is from सूर्यकांत त्रिपाठी "निराला" or हरिवंशराय बच्चन (Harivansh Rai Bachchan). But it has been clarified directly by Amitabh Bachchan ji in following msg on facebook - https://www.facebook.com/AmitabhBachchan/posts/1153934214640366)

लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती है,
चढ़ती दीवारों पर, सौ बार फिसलती है।
मन का विश्वास रगों में साहस भरता है,
चढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना न अखरता है।
आख़िर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

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Leek Par Woh Chale

लीक पर वे चलें जिनके..
- सर्वेश्वरदयाल सक्सेना (Sarveshwar Dayal Saxena)

लीक पर वे चलें जिनके
चरण दुर्बल और हारे हैं
हमें तो जो हमारी यात्रा से बने
ऐसे अनिर्मित पन्थ प्यारे हैं

साक्षी हों राह रोके खड़े
पीले बाँस के झुरमुट
कि उनमें गा रही है जो हवा
उसी से लिपटे हुए सपने हमारे हैं

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Reading and Writing in Hindi on Ubuntu Linux

Now-a-days most linux distributions support reading and writing in any unicode language easily. Following are the instructions for enabling hindi support in Ubuntu (it's based on Ubuntu Edgy, but I think it's same for Dapper).

Reading Hindi Websites

By default, Firefox will show unicode hindi font based websites, but font is all garbled - especially 'choti e ki matra' is rendered incorrectly...

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Mein Badha Hi Jaa Raha Hoon

मैं बढ़ा ही जा रहा हूँ
- शिवमंगल सिंह सुमन (Shiv Mangal Singh Suman)

मैं बढ़ा ही जा रहा हूँ, पर तुम्हें भूला नहीं हूँ ।

चल रहा हूँ, क्योंकि चलने से थकावट दूर होती
जल रहा हूँ क्योंकि जलने से तमिस्त्रा चूर होती
गल रहा हूँ क्योंकि हल्का बोझ हो जाता हृदय का
ढल रहा हूँ क्योंकि ढलकर साथ पा जाता समय का ।

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Nur Ho Na Nirash Karo Man Ko

नर हो न निराश करो मन को
- मैथिलीशरण गुप्त (Maithili Sharan Gupt)

नर हो न निराश करो मन को
कुछ काम करो कुछ काम करो
जग में रहके निज नाम करो
यह जन्म हुआ किस अर्थ अहो
समझो जिसमें यह व्यर्थ न हो
कुछ तो उपयुक्त करो तन को
नर हो न निराश करो मन को ।

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Hazaaron Khwaishein Aisi Ki Har Khwaish Pe Dam Nikle

हजारों ख्वाहिशें ऐसी कि हर ख्वाहिश पे दम निकले
- मिर्जा गालिब (Mirza Ghalib)

हजारों ख्वाहिशें ऐसी कि हर ख्वाहिश पे दम निकले
बहुत निकले मेरे अरमाँ, लेकिन फिर भी कम निकले

डरे क्यों मेरा कातिल क्या रहेगा उसकी गर्दन पर
वो खून जो चश्म-ऐ-तर से उम्र भर यूं दम-ब-दम निकले

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Where the mind is without fear

Where the mind is without fear and the head is held high
Where knowledge is free
Where the world has not been broken up into fragments
By narrow domestic walls

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Parichay

परिचय
- रामधारी सिंह दिनकर (Ramdhari Singh Dinkar)

सलिल कण हूँ, या पारावार हूँ मैं
स्वयं छाया, स्वयं आधार हूँ मैं
बँधा हूँ, स्वपन हूँ, लघु वृत हूँ मैं
नहीं तो व्योम का विस्तार हूँ मैं

समाना चाहता है, जो बीन उर में
विकल उस शुन्य की झनंकार हूँ मैं
भटकता खोजता हूँ, ज्योति तम में
सुना है ज्योति का आगार हूँ मैं

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Vande Mataram

वन्दे मातरम्
- बंकिमचंद्र चॅटर्जी

वन्दे मातरम्। वन्दे मातरम्॥
सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्
शस्य श्यामलां मातरंम् .
शुभ्र ज्योत्सनाम् पुलकित यामिनीम
फुल्ल कुसुमित द्रुमदलशोभिनीम्,
सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीम् .
सुखदां वरदां मातरम् ॥

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Aag Ki Bheek

आग की भीख
- रामधारी सिंह दिनकर (Ramdhari Singh Dinkar)

धुँधली हुई दिशाएँ, छाने लगा कुहासा
कुचली हुई शिखा से आने लगा धुआँसा
कोई मुझे बता दे, क्या आज हो रहा है
मुंह को छिपा तिमिर में क्यों तेज सो रहा है
दाता पुकार मेरी, संदीप्ति को जिला दे
बुझती हुई शिखा को संजीवनी पिला दे
प्यारे स्वदेश के हित अँगार माँगता हूँ
चढ़ती जवानियों का श्रृंगार मांगता हूँ

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